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लोककथाएँ और परंपराएँ की एक कहानी | A tale of folklore and traditions

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यहाँ एक प्रसिद्ध भारतीय लोककथा प्रस्तुत है, जो परंपराओं और नैतिक मूल्यों पर आधारित है: राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा बहुत समय पहले की बात है, अयोध्या में राजा हरिश्चंद्र राज्य करते थे। वे सत्य और न्याय के पक्के थे। उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैली हुई थी। एक बार महर्षि विश्वामित्र ने उनकी सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेने का निश्चय किया। एक दिन महर्षि राजा के दरबार में आए और बोले, "राजन, आपने स्वप्न में मुझे अपना पूरा राज्य दान करने का वचन दिया था। अब मैं उसे लेने आया हूँ।" राजा हरिश्चंद्र धर्म के पक्के थे, इसलिए उन्होंने बिना संकोच अपना पूरा राज्य दान कर दिया। अब उनके पास कुछ भी शेष नहीं रहा। महर्षि ने उनसे दक्षिणा के रूप में कुछ सोना माँगा। राजा बोले, "मेरे पास अब कुछ नहीं बचा। मैं मेहनत करके दक्षिणा चुकाऊँगा।" राजा ने अपनी पत्नी और पुत्र के साथ काशी जाकर एक डोम के यहाँ नौकरी कर ली। वहाँ वे श्मशान में काम करने लगे और अंतिम संस्कार के लिए कर वसूलते थे। एक दिन उनके पुत्र की मृत्यु हो गई। पत्नी जब पुत्र का अंतिम संस्कार करने आई तो राजा ने उनसे कर माँगा। पत्नी ने आँसुओं के ...